पहली बार पिता बनने का एहसास ..... एक ख़त मेरे बच्चे को जन्म से पहले
प्यारे बेटू/बेटी
तुम तो अभी तक आए भी नहीं हो लेकिन जब से तुम्हारे आने की आहट
हुई है बता नहीं सकता हूं अंदर
बेचैनी किस तरह आकाश में छाए बादलों की तरह उमड़ घुमड़ रही है । अंदर से खुशी भी होती है , बेचैनी भी होती है । कभी-कभी लगता है क्या मैं पिता बनूंगा तो कैसा लगूंगा????
मेरा बेटू मुझे कैसे बुलाएगा ???पहली बार जब तुम्हारे मुंह से
"पापा " सुनूंगा तो कैसा लगेगा??? कितनी खुशी होगी??? कितने जिम्मेदारियों का एहसास सिर्फ एक शब्द 'पापा ' सुनने भर
से हो जाएगा।
बेटू जब तक पिता बनने का एहसास नहीं हुआ था तब तक शायद कभी
ठीक से समझ ही नहीं सका कि माता-पिता बनने का एहसास क्या होता है । सच में तुम्हारे आने का एहसास बहुत ही खास है । जिंदगी में पहली बार अनदेखी अनजानी स्थिति से कुछ ऐसा लगाव सा हो गया है कि उसे शब्दों में बयां नहीं
किया जा सकता है। रोज तुम्हारी मम्मी से पूछता हूं मेरा बच्चा ठीक तो है ना??
तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं ?? हर दिन गिनता हूं। जब भी
ऑफिस में कहीं साइन करता हूं और नीचे तारीख लिखता हूं तो मन ही मन तुम्हारे आने का दिन याद आ जाता है । दिन में
10 बार तुम्हें गोद लेने का मन करता है लेकिन उसमें
वक्त है अभी लेकिन भावनाओं के सैलाब को
कौन रोक सकता है भला?
कभी-कभी तुम्हारी मम्मी के बारे में सोचता हूं तो मन
अंदर से और गुदगुदा सा जाता है। मैं और तुम्हारी मम्मी
घूमने या यूं कहो हनीमून ट्रिप पर मनाली में थे। शादी के 2 महीने के बाद हम दोनों ने
मनाली जाने का प्लान बनाया था। मनाली पहुंचने तक तो
सब ठीक था लेकिन वहां दूसरे दिन तुम्हारी मम्मी को काफी थका हुआ और सुस्त देखकर मुझे कुछ अटपटा सा लगा।
वहां प्रेगनेंसी टेस्ट किट से चेक करने के बाद जो रिजल्ट आया वह भी बड़ा
मजेदार वकया था, तुम सुनोगे तो हंसी आएगी -
दो लाइन के बाद तीसरी लाइन किट में आधी अधूरी उगी थी। तुम्हारी मम्मी का
कहना था- " हां तीसरी लाइन उगी है मुझे कुछ अलग सा लग रहा है" जबकि मुझे लग रहा था कि तीसरी लाइन स्पष्ट नहीं उगी है इसका मतलब ऐसी कोई बात नहीं है । तीसरे दिन ही हम लोग मनाली से वापस हो गए फ्लाइट में तुम्हारी मम्मा ने कहा कि पेट में
हल्का दर्द महसूस हो रहा है किसी तरह जल्दी से घर पहुंचा और फिर गोड्डा में दादी के साथ ले जाकर डॉक्टर से मम्मा का चेकअप करवाया। मैं तो डर और दादी के सामने शर्म से अंदर डॉक्टर के पास गया ही नहीं । बहाना बनाकर बाहर
ही घूमता रहा लेकिन अब अफसोस होता है कि तुम्हारे आने की पक्की खबर सबसे पहले मैं नहीं सुन सका।
बाद में बाहर में प्रेगनेंसी टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव देखकर
जो खुशी का अनुभव हुआ था वह गूंगे के
गुड़ के समान है जिसे बयां नहीं किया जा सकता है ।तुम्हारी दादी भी खुश हुई थी लेकिन दादी के सामने मैंने
थोड़ा सा टेंस होने का नाटक किया ,
घर आकर तुम्हारी मम्मा को जी भर कर किस किया और थैंक्यू कहा । उस दिन तुम्हारी मम्मा की आंखों
में जो चमक देखा उसका वीडियो यूट्यूब पर है जब तुम्हारी मम्मा ने पहली बार कहा - ''बधाई हो आप पापा बनने वाले हैं ''
तुम्हें पता है बेटू शुरुआत के कुछ सप्ताह में तो मुझे
कभी-कभी टेंशन भी होता था कि यह सब इतनी जल्दी क्यों हो गया। तुम्हारी मम्मा को भी बोलता रहता था- " इतनी जल्दी क्यों??" लेकिन कुछ ही दिनों में लगने लगा कि जो हुआ है ठीक ही हुआ है।
बेटू तुम्हारा जिस दिन अल्ट्रासाउंड हुआ था, तुम्हारे वह धड़कन की आवाज आज भी कानों में गूंजती है। पहली बार तुम्हारी धुंधली सी छवि देखा
था.... तुम मम्मा के गर्भ में मात्र 7
सेंटीमीटर के थे और बिलकुल सुरक्षित। घर आकर अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट का एक-एक वाक्य गूगल कर करके समझा। कुछ मेडिकल टर्म समझ से बाहर थे फिर भी उसे नेट से खंगाल कर समझा।
अब जब 3 महीने बीत चुके हैं तो
तुम्हारे मम्मा के व्यवहार ,आदत में भी परिवर्तन आ रहा है । दिन में 5 -6 बार उल्टी करती है । फल
सब्जी सब ला कर देता हूं लेकिन खाने
से हमेशा भागती रहती है। कभी-कभी इसके नहीं खाने को लेकर हमारे बीच झगड़ा भी हो चुका है।
पहले हमेशा साड़ी, सूट, हार मांगती रहती थी अब बच्चों की फोटो, डॉल आदि देखकर खुश हो जाती
है। दुर्गा पूजा के मेले में पहली बार उसे एक खिलौना वाला बाबू दिलवाया जो बटन
दबाने पर हंसता था उसे घर लाकर उसके
खिलखिलाने की आवाज सुनकर कितना हंसी थी, कितनी खुश हुई थी ...आज भी याद है.।
तुम्हारे आने की आहट को अब हर दिन अपने अंदर महसूस करता
हूं। रोज तुम्हारे मम्मी के पेट को छूकर, चूमकर तुम्हें महसूस करने
की कोशिश करता हूं । जब भी कहीं किसी छोटे बच्चे को देखता हूं तो तुम्हारे बारे में सोचने लगता हूं । दूसरे के बच्चों को देखकर अब ईर्ष्या सी होने लगती है।
लेकिन
तुम्हारा आना इतना भी सहज नहीं है बेटू।
तुम्हें पाने के लिए तुम्हारी मम्मी और मैं मिलकर योगिनी माता मंदिर में मन्नतें मांगी थी
। कितनी रातें मैं और पल्लवी
तुम्हारे बारे में बातें करते हुए .. . सोचते हुए .....बिताई
है। बोल बम गया था वहां भी तुम्हारे आने के लिए मन्नतें मांगी थी। धन्यवाद उन सभी का जिन्होंने ये उपहार इतनी
जल्दी दे दिया हालांकि तुम्हारा नाम अभी तक सोचा नहीं है ।
बस अब उस
दिन का इंतजार कर रहा हूं जब तुम मेरी गोद में होगे, बेटा या बेटी का अंतर
तुम्हारे आने की खबर के साथ ही खत्म हो गया था । तुम जिस भी तरह आओ बेटा या बेटी बनकर हमेशा मेरी आंखो के तारे बनकर रहोगे ।
तुम्हारे इंतजार में
तुम्हारा पापा
GANGESH GUNJAN
19.10.2019

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