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कुछ छूट जाने की कसक तथा जो कुछ बचा रह गया था उसे सवांर लेने की चाहत

गुंजन की दिनभर की   दिनचर्या कुछ इस प्रकार थी कि शायद ही मुश्किल से कुछ रविवार और पर्व त्योहारों की छुट्टियों के अलावे की छुट्टियों के अलावे उसे अन्य   कभी कोई छुट्टी मिलती हो।   और शादी के बाद तो उसकी जिंदगी कितनी बदल गई थी न | शादी के बाद शुरुआत के कुछ दिनों तक तो कुछ दिनों तक तो उसे अपने घर और ऑफिस वाली स्थिति में सामंजस्य बिठाते-बिठाते कब साल बीत गए पता ही नहीं चला | इसी बीच एक बेटी के बाप बनने का परम सौभाग्य भी उसे प्राप्त हुआ | अब बच्ची के आ जाने के बाद जिम्मेदारियां भी कुछ बढ़ गई थी | दिनभर ऑफिस का काम , देर शाम घर आने के बाद बच्चे की समस्या , रात को 2 - 3 बजे तक बेटी के जग जाने जाने के कारण उसे सुलाना , डायपर बदलना , दूध की बोतल भर कर देना , आधी अधूरी नींद के साथ अगले दिन फिर ऑफिस,   ऑफिस में दिनभर जम्हाई लेना ,   कितनी ही इस तरह की जिम्मेदारियां बढ़ गई थी उन दिनों। आज जब उसकी बेटी की विदाई हो रही थी तो बेटी ने जाते वक्त अपनी नानी को, मां को ,   दादा दादी को ,   अन्य सभी सगे संबंधियों को गले लगा कर खूब रोया खूब रोया | सभी की आंखों म...

पहली बार पिता बनने का एहसास ..... एक ख़त मेरे बच्चे को जन्म से पहले

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प्यारे बेटू/बेटी  तुम तो अभी तक आए भी नहीं हो लेकिन जब से तुम्हारे आने की आहट हुई है बता नहीं सकता हूं अंदर बेचैनी किस तरह आकाश में छाए बादलों की तरह उमड़ घुमड़ रही है । अंदर से खुशी भी होती है , बेचैनी भी होती है ।  कभी-कभी लगता है क्या मैं पिता बनूंगा तो कैसा लगूंगा????  मेरा बेटू मुझे कैसे बुलाएगा ???पहली बार जब तुम्हारे मुंह से "पापा " सुनूंगा तो कैसा लगेगा??? कितनी खुशी होगी??? कितने जिम्मेदारियों का एहसास सिर्फ एक शब्द 'पापा ' सुनने भर से हो जाएगा।   बेटू जब तक पिता बनने का एहसास नहीं हुआ था तब तक शायद कभी ठीक से समझ ही नहीं सका कि माता-पिता बनने का एहसास क्या होता है  । सच में तुम्हारे आने का एहसास बहुत ही खास है । जिंदगी में पहली बार अनदेखी अनजानी स्थिति से कुछ ऐसा लगाव सा हो गया है कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।  रोज तुम्हारी मम्मी से पूछता हूं मेरा बच्चा ठीक तो है ना?? तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं ?? हर दिन गिनता हूं। जब भी ऑफिस में कहीं साइन करता हूं और नीचे तारीख लिखता हूं तो मन ही मन तुम्हारे ...